उम्मीदों का सूरज

कहीं तो निकलेगा उम्मीदों का सूरज,
कभी तो होगी खुशी की सुबह।
चल रहा हूँ एक राह पकड़ कर,
समय,वजह ना मंज़िल की खबर।।
हर सुबह निकलेगा कारवां,
हर सुबह ढूंढेगे नया ठिकाना।
रुखसत लेकर पुरानी मंज़िल से,
पूछता हूँ मैं अपने दिल से।।
ना जाने कितनी दूर और चलेंगे,
ना जाने कितने दिन और ढलेंगे।
फिर आती है दिल से ही आवाज़,
फिर से छिड़ जाता है वही साज़।।
कहीं तो निकलेगा उम्मीदों का सूरज,
कभी तो होगी खुशी की सुबह।।
                                -अक्स  (Anuj Sharma)
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