क्या बात है?

किताब के पन्नें पलट कर सोचता हूँ,
यूँ पलट जाती जिंदगी तो क्या बात है?
रात कटती नही दिन बहलता नही,
यूँ जो ख़ुशियाँ से भर जाए तो क्या बात है?

मिट्टी से बने और मिल गये मिट्टी में
यूँ पल भर में जी लेते जिंदगी तो क्या बात है?
ढूँढते थे जिन्हें दर-बदर
वो यूँहि एक मोड़ पर मिल जाते, तो क्या बात है?

सब कुछ पाया एक तेरे सिवाय,
यूँहि मिल जाते हमें तो क्या बात है?
तस्वीरों से बातें की, फिर दिल को समझाया,
ख़्वाबों से निकल आते, तो क्या बात है?

किताब के पन्नें पलट कर सोचता हूँ,
यूँ पलट जाती जिंदगी तो क्या बात है?
रास्ते कठिन है, चलना है दूर तलक
यूँहि संग चलते चलते, कट जाती जिंदगी तो क्या बात है?

                          ~ सुब्रत सौरभ 

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